उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने शहीद स्थल पर माननीय मुख्यमंत्री जी, उत्तराखंड सरकार, देहरादून को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन का विषय था—चिन्हीकरण की तिथि बढ़ाने तथा छूटे हुए उत्तराखंड आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण किए जाने के संबंध में। परिषद ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में हजारों आंदोलनकारियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर करते हुए राज्य के गठन में अमूल्य योगदान दिया। उनके बलिदान और संघर्ष के फलस्वरूप ही उत्तराखंड राज्य का अस्तित्व संभव हो सका। सरकार द्वारा चिन्हीकरण की प्रक्रिया चलाई जा रही है, किंतु अभी भी बड़ी संख्या में वास्तविक एवं प्रामाणिक आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित हैं। इससे आंदोलनकारियों एवं उनके परिवारजनों में गहरी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।
ज्ञापन में निम्न मुख्य मांगें रखी गईं:
1. चिन्हीकरण की वर्तमान तिथि बढ़ाई जाए, जिससे छूटे हुए आंदोलनकारी भी आवेदन कर सकें।
2. छूटे हुए समस्त प्रामाणिक उत्तराखंड आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर उन्हें सम्मान एवं सरकारी सुविधाओं का लाभ दिया जाए।
3. चिन्हीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल एवं समावेशी बनाया जाए, जिससे कोई भी वास्तविक आंदोलनकारी वंचित न रह जाए।
4. छूटे हुए आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु शिविर आयोजित किए जाएं तथा आवश्यक दस्तावेजों में सहायता उपलब्ध कराते हुए दो वरिष्ठ आंदोलनकारियों के सत्यापन को आधार बनाया जाए।
ज्ञापन सौंपने के बाद माननीय मुख्यमंत्री जी ने संयुक्त परिषद के प्रतिनिधि को आश्वासन दिया कि चिन्हीकरण की प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाएगा, जिससे कोई भी वास्तविक आंदोलनकारी वंचित न रहे। परिषद ने सरकार के इस आश्वासन का स्वागत किया और आशा जताई कि शीघ्र ही ठोस आदेश जारी होंगे तथा छूटे हुए उत्तराखंड आंदोलनकारियों को न्याय एवं सम्मान प्राप्त होगा। इससे राज्य आंदोलन के इतिहास और बलिदान को भी उचित स्थान मिल सकेगा।
इस अवसर पर मुजफ्फरपुर काण्ड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। धरने में संरक्षक बालेश बबानिया, अध्यक्ष सुरेश कुमार, अनंत आकाश, सचिव सीपीएम, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष लेखराज, महिला अध्यक्ष प्रमिला रावत, सुभागा फर्सवाण, राजेश शर्मा, प्रभात डण्डरियाल, मंजू पंवार, गीता नेगी, रेखा शर्मा, सुरेंद्र सिंह सजवाण, चिंतन सकलानी, देवेश्वरी गुसाईं, शांति तड़ियाल, एकादशी, पुष्पा बहुगुणा, मीरा गुसाईं, अजय तिवारी, भगत सिंह रावत, जगदेश्वरी अन्थवाल, कल्पेश्वरी, रेखा शर्मा, सुनीता बहुगुणा, सुमित्रा रावत, नुरैशा अंसारी, गौरा देवी, शांति, पुष्पा रावत, विमला भट्ट, शाकुम्भरी, विमला, शांता उनियाल, नारायण दत्त, शांति बुटोला, सतेश्वरी बहुगुणा, इंदर दत्त बहुगुणा, बिंदा मिश्रा, शीला बहुगुणा, अनिता नेगी, कुसुम नौडियाल, शशि जैन, जानकी भट्ट, यशोदा देवीआदि बड़ी संख्या में आंदोलनकारी शामिल थे।
ज्ञापन की प्रति महामहिम राज्यपाल जी, उत्तराखंड, देहरादून को भी प्रेषित की गई।