जनसेवा और भरोसे की मिसाल—यूँ ही नहीं उत्तराखंड पुलिस ‘मित्र पुलिस’ कहलाती है

देहरादून। मानवता और त्वरित पुलिस कार्रवाई का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है,जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उत्तराखंड पुलिस को ‘मित्र पुलिस’ कहा जाता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार,कल रात करीब 11:30 बजे देहरादून एसएसपी के सरकारी नंबर पर गुरुग्राम हरियाणा से एक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुआ। कॉल में दूसरे शहर में हुए एक सड़क हादसे की सूचना दी गई,जिसे तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देशनुसार बिना देर किए रात्रि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी प्रदीप रावत को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही प्रदीप रावत ने पंडितवाड़ी स्थित पुलिस चौकी को सूचित किया।

चूंकि संबंधित व्यक्ति महेश पाठक का मोबाइल फोन बंद था,ऐसे में पंडितवाड़ी में स्थित चौकी इंचार्ज मोहन नेगी व पुलिसकर्मी देवेंद्र तुरंत उनके निवास पर पहुंचे और रात में ही महेश पाठक को हादसे की पूरी जानकारी दी गई, इतना ही नहीं,पुलिसकर्मियों ने महेश पाठक की सीधे दूसरे शहर में मौजूद व्यक्ति से बात भी करवाई, जिससे उन्हें स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सकी।

इस पूरी घटना ने पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण को उजागर किया है। आधी रात को भी बिना समय गंवाए की गई यह कार्रवाई वास्तव में ‘मित्र पुलिस’ की परिभाषा को सार्थक करती है।

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