भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) व विभिन्न राजनैतिक व सामाजिक संगठनों ने द्वारा आज 26 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार को लिखा गया है। इसमें सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जारी एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) पर आपत्ति जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि हाल ही में भाजपा विधायक और उनके समर्थकों द्वारा सरकारी अधिकारी पर हमले की घटना से साबित होता है कि सत्तारूढ़ दल के लोग प्रशासनिक कामकाज में बाधा डाल रहे हैं।
ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन बिन्दु प्रमुखता उठाये गये
प्रमुख बिंदु:
1. सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों पर हमलों में सत्तारूढ़ दल (भाजपा) से जुड़े लोगों को नियंत्रित करना सरकार कि पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
2. सरकार कौ एसओपी का उपयोग जनतांत्रिक आंदोलनों और आम जनता की आवाज को दबाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
3.सरकार कौ एसओपी जारी करने की पृष्ठभूमि और तत्कालिक कारण स्पष्ट किए जाने चाहिएं।
रजनैतिक दलों व सामाजिक संगठनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि एसओपी का सही मायने में अपने मन्त्रियों व विधायकों कौ नियन्त्रित करने कै लिऐ करें ,जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री कौ ज्ञापन प्रेषित किया ।
देहरादून 26 फरवरी 026,
बीते रोज मुख्यमंत्री जी के आदेश पर मुख्य सचिवजी द्वारा अधिकारियों/कर्मचारियों की सुरक्षा के लिऐ जारी एसओपी के सन्दर्भ में जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री जी को ज्ञापन प्रेषित करते हुऐ विभिन्न राजनैतिक दलों व सामाजिक संगठनों ने कहा कि हम सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों की सुरक्षा के प्रबल समर्थक हैं किन्तु मुख्यमत्रीजी कौ सबसे पहले अपने ही दल के मानननीयौं कौ नियन्त्रित करना होगा क्योंकि आपके (मुख्यमंत्री ) कार्यकाल में जितने भी अधिकारियों व कर्मचारियों पर हमले हुऐ हैं ,उनमें सरकार के मन्त्री व विधायक तथा राजनेता शामिल हैं ।एसओपी विश्वनीयता तभी साकार हौ सकती है, जब सबसे पहले कार्यवाही उन पर हो न कि माफी मांग कर दबाव बनाकर पीड़ितों पर फर्जी केस दर्ज कर कानून के चंगुल से बच निकले ऐसा अनेकों बार होता रहा है और मामले में लीपापोती होती रही है ।आज एसओपी उसी कढी़ का हिस्सा है ।
मुख्यमंत्री जी को सम्बोधित ज्ञापन में संयुक्त ज्ञापन में निम्नलिखित तीन बिन्दुओं पर आवश्यक कार्यवाही का अनुरोध किया है :-
(1) सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों पर हो रहे हमलों में सतारूढ़ दल से जुड़े लोगों को नियन्त्रित करना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ।
(2) एसओपी क उपयोग जन तान्त्रिक आन्दोलनौं कौ कमजोर करने कै लिऐ नहीं किया जान चाहिए ,सरकार कौ गरन्टी देना होग ।
(3)सरकार कौ एसओपी जारी करने कै सही कारण बताने चाहिए ।
ज्ञापन देने वालों में सीपीआईएम सचिव अनन्त आकाश, संयुक्त परिषद संरक्षक नवनीत गुसांई , आयूपी के महमन्त्री बालेश बबानिया, यूकेडी नेत्री प्रमिला रावत, अध्यक्ष बृजेन्द्र रावत,सीआईटीयू महामंत्री लेखराज,संयुक्त परिषद के जिला अध्यक्ष सुरेशकुमार प्रवक्ता चिन्तन सकलानी ,सचिव अभिषेक भण्डारी, हिमन्शु चौहान ,अनुराधा ,’प्रभाव डण्डरियाल आदि शामिल थे ।