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  • श्रावण मास में टपकेश्वर मंदिर परिसर में गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश, ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत रोपे रुद्राक्ष और बेल

    श्रावण मास में टपकेश्वर मंदिर परिसर में गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश, ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत रोपे रुद्राक्ष और बेल

    देश के यशश्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आहवान एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत आज धर्म संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड की ओर से पौराणिक श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में सोमवार के पवित्र सोमवार के पावन अवसर पर टपकेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य पुजारी भरत गिरी जी महाराज का शुभ आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री कोस्तुभानंद जोशी प्रकोष्ठ संयोजक भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के कर कमलों से रुद्राक्ष और बेल के पेड़ रोपित किए गए जोशी ने धर्म संस्कृति मठ धर्मशाला प्रकोष्ठ भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना करते हुए श्रावण मास में पूरे प्रदेश में अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण का आहवान किया कार्यक्रम संयोजक योगाचार्य डा0 बिपिन जोशी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के एक पेड़ मां के नाम अभियान को पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए एक सार्थक पहल बताते हुवे शिव भक्तों से शिव पूजा के साथ साथ बृक्षरोपण का आहवान किया उन्होंने कावड़ यात्रियों से भी कावड़ यात्रा मार्गो में अधिक से अधिक पेड़ रोपित करने के साथ साथ साफ सफाई बनाए रखने का अनुरोध किया, इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी प्रकोष्ठ संयोजक कोस्तुभानंद जोशी, योगाचार्य डा0 बिपिन जोशी सह संयोजक एवं देहरादून जिला प्रभारी घनश्याम शर्मा, सह संयोजक शेखर श्रीवास्तव, देहरादून महानगर संयोजक आशीष बलूनी सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे , पौराणिक श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजन ओर जलाभिषेक भी किया गया।

  • उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबी से उत्तराखंड में बिजली रोस्टरिंग, 560 मेगावाट क्षमता प्रभावित

    उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबी से उत्तराखंड में बिजली रोस्टरिंग, 560 मेगावाट क्षमता प्रभावित

    दिनांक 31 जुलाई, 2026 को सायं 19:30 बजे से 01 अगस्त, 2026 को प्रातः 01:10 बजे तक विद्युत उत्पादन इकाइयों में आकस्मिक तकनीकी व्यवधान के कारण की गई रोस्टरिंग के फलस्वरूप प्रदेश के विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को सीमित अवधि के लिए विद्युत रोस्टरिंग का सामना करना पड़ा।

    रोस्टरिंग की आवश्यकता विद्युत उत्पादन में अचानक आई कमी, नदियों में अचानक अत्यधिक सिल्ट के प्रवाह के कारण उत्पन्न हुई थी। इस दौरान एपीएल रायगढ़ (350 मेगावाट) इकाई में स्टीम लीकेज, व्यासी जलविद्युत परियोजना (120 मेगावाट) में उच्च PPM तथा चिल्ला जलविद्युत परियोजना (88 मेगावाट) में उच्च PPM के कारण लगभग 560 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता आकस्मिक रूप से उपलब्ध नहीं हो सकी, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश में विद्युत मांग एवं उपलब्धता के मध्य असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो गई।

    इस अवधि के दौरान निगम द्वारा विद्युत आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने हेतु ऊर्जा एक्सचेंजों से अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध करने के व्यापक प्रयास किए गए। तथापि, ऊर्जा एक्सचेंजों में विद्युत की सीमित उपलब्धता के कारण आवश्यकतानुसार विद्युत उपलब्धता किया जाना संभव नहीं हो सका। परिणामस्वरूप, ग्रिड की सुरक्षा एवं विद्युत व्यवस्था के संतुलित संचालन को बनाए रखने के उद्देश्य से रोस्टरिंग लागू करना आवश्यक हो गया।

    उत्तराखण्ड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) अपने समस्त सम्मानित विद्युत उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं यथासंभव 24×7 निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। तथापि, विद्युत उत्पादन एवं आपूर्ति प्रणाली में उत्पन्न होने वाले अप्रत्याशित तकनीकी अथवा प्राकृतिक कारणों से कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं, जिनके कारण विद्युत उपलब्धता प्रभावित होती है और विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं संतुलित संचालन हेतु सीमित अवधि के लिए रोस्टरिंग लागू करना अपरिहार्य हो जाता है। निगम द्वारा ऐसी परिस्थितियों में भी विद्युत आपूर्ति को यथाशीघ्र सामान्य करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए जाते हैं। इस पृष्ठभूमि में उत्तराखण्ड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड अपने सभी सम्मानित उपभोक्ताओं से सहयोग एवं धैर्य बनाए रखने की विनम्र अपील करता है।

  • प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड महिला कांग्रेस ज्योति रौतेला के नेतृत्व में डीएम कार्यालय का घेराव, अमित शाह के इस्तीफे व प्रधानमंत्री से माफी की मांग

    प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड महिला कांग्रेस ज्योति रौतेला के नेतृत्व में डीएम कार्यालय का घेराव, अमित शाह के इस्तीफे व प्रधानमंत्री से माफी की मांग

    उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में शनिवार को “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के तहत जिलाधिकारी कार्यालय का जोरदार घेराव एवं प्रदर्शन किया गया। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज, प्रदेश की लचर शिक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते हमलों तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन में छात्र-छात्राओं, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

    दोपहर लगभग 12:30 बजे शुरू हुए प्रदर्शन के दौरान अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, लेकिन बारिश आंदोलनकारियों के हौसले को तनिक भी डिगा नहीं सकी। कार्यकर्ता घंटों तक बारिश में भीगते हुए पूरे जोश और उत्साह के साथ “अमित शाह इस्तीफा दो”, “लोकतंत्र बचाओ”, “शिक्षा में सुधार करो”, “छात्रों पर अत्याचार बंद करो”, “तानाशाही नहीं चलेगी” जैसे गगनभेदी नारों के साथ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे। लगभग दो से तीन घंटे तक चले इस आंदोलन से पूरा डीएम कार्यालय परिसर नारों से गूंजता रहा।

    प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार दमन किया जा रहा है तथा छात्रों और युवाओं की आवाज़ को लाठियों के बल पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन के बाद डीएम कार्यालय से कचहरी रोड तक जोरदार विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया, जिससे पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की धक्का-मुक्की एवं नोकझोंक भी देखने को मिली। हालांकि कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्वक अपना विरोध दर्ज कराया और कार्यक्रम का समापन किया।

    इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार छात्रों की आवाज़ को भी दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस पूरे घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री Narendra Modi का बयान सामने आया, उससे देशभर के छात्र-युवाओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

    उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा से जुड़े विवादों और तनाव के कारण अनेक विद्यार्थियों ने अपनी जान गंवाई है, जो अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। ऐसे संवेदनशील विषयों पर केंद्र सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए तथा प्रधानमंत्री देश के छात्र-युवाओं से माफी मांगें। साथ ही जंतर-मंतर में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें।
    उन्होंने कहा कि महिला कांग्रेस छात्रों, युवाओं और लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने के हर प्रयास का सड़क से सदन तक पुरजोर विरोध करेगी।यदि छात्रों के साथ अन्याय और दमन की कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

    आज के प्रदर्शन में शोभा बड़ौनी, पुष्पा पवार, अनुराधा, बबीता, रुचि रौतेला, नंदिता गढ़िया, कुसुम, रोबिन त्यागी, विनीत प्रसाद भट्ट, वीरेंद्र पवार, हेमंत उप्रेती, जमाल खान, गौरव रावत, नितिन उनियाल, अभिषेक जुयाल सहित महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, छात्र-छात्राओं एवं कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

  • 16 करोड़ की लागत से बने नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड 16 दिन में ढही, कांग्रेस ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

    16 करोड़ की लागत से बने नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड 16 दिन में ढही, कांग्रेस ने उठाए निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

    प्रेमनगर में नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर क्षतिग्रस्त पुल का लगभग ₹16 करोड़ की लागत से जीर्णोद्धार किया गया था, लेकिन आमजन के लिए खोले जाने के मात्र 16 दिनों के भीतर ही पुल की एप्रोच रोड का हिस्सा ढह जाना बेहद गंभीर मामला है। यह घटना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

    यदि सरकार वास्तव में संवेदनशील होती, तो इस मामले में तत्काल जवाबदेही तय की जाती, संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाता तथा जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों को निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराई जाती।

    उत्तराखंड में अब ऐसा प्रतीत होता है कि “भाजपा सरकार” और “भ्रष्टाचार” एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन कार्रवाई अक्सर केवल छोटी मछलियों तक सीमित रह जाती है। बड़े मगरमच्छों पर हाथ न डालना शासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    इस मामले में अधिकारियों की प्रारंभिक रिपोर्ट में पुल की एप्रोच रोड के ढहने के पीछे प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन को भी एक कारण बताया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो यह और भी गंभीर विषय है। प्रश्न यह है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी और उस जिम्मेदारी का निर्वहन क्यों नहीं किया गया?

    किसी ठेकेदार का किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना या न होना महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण है निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जनता के धन का सही उपयोग। यदि गुणवत्ता में लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए तथा विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

    सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसी गंभीर घटनाओं के बावजूद न तो जिम्मेदारी तय होती है और न ही प्रभावी कार्रवाई दिखाई देती है। जब तक जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक जनता के धन की बर्बादी और विकास कार्यों में लापरवाही का सिलसिला रुकना मुश्किल है

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सेनेटरी नैपकिन के नाम पर कथित वसूली का आरोप, संगठन ने जताया विरोध

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सेनेटरी नैपकिन के नाम पर कथित वसूली का आरोप, संगठन ने जताया विरोध

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से विभागीय अधिकारियों द्वारा सेनेटरी नैपकिन के नाम पर कथित रूप से जबरन धनराशि वसूले जाने का मामला सामने आया है। आंगनबाड़ी संगठन ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    संगठन का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पिछले कई वर्षों से विभाग की ओर से सेनेटरी नैपकिन के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा इन नैपकिनों को स्वच्छता के उद्देश्य से लोगों तक पहुंचाने और निर्धारित धनराशि में बेचने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। हालांकि, संगठन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इन नैपकिनों की बिक्री नहीं हो पा रही है और बड़ी संख्या में पैकेट बिना बिके रह जाते हैं।

    आरोप है कि बिना बिके नैपकिन की राशि भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जमा कराने के लिए सुपरवाइजर और सीडीपीओ स्तर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि कार्यकर्ता पूर्व में भी इस संबंध में धनराशि जमा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें जमा की गई राशि की कोई रसीद या स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया।

    संगठन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दोबारा सेनेटरी नैपकिन के पैकेट देकर उन्हें बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऐसे में जो नैपकिन बिक नहीं रहे हैं, उनकी राशि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने सीमित मानदेय से कहां से जमा करें।

    संगठन ने विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि सेनेटरी नैपकिन की बिक्री का जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से हटाकर दुकानों अथवा संबंधित बिक्री केंद्रों को दिया जाए। यदि सरकार का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों तक स्वच्छता संबंधी सुविधाएं पहुंचाना है, तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर नैपकिन नि:शुल्क वितरित किए जाएं।

    संगठन ने यह भी मांग की है कि जब तक पहले से उपलब्ध सेनेटरी नैपकिन की बिक्री नहीं हो जाती, तब तक किसी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से उसकी राशि की वसूली न की जाए। साथ ही भविष्य में आंगनबाड़ी केंद्रों पर नैपकिन भेजने से पहले इसकी वितरण और बिक्री की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    संगठन ने चेतावनी दी कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक दबाव और कथित जबरन वसूली की व्यवस्था को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • शहीद ऊधम सिंह की शहादत दिवस पर सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि, प्रदेश की खुशहाली के लिए की कामना

    शहीद ऊधम सिंह की शहादत दिवस पर सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि, प्रदेश की खुशहाली के लिए की कामना

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कम्बोज धर्मशाला गदरपुर में शहीद शिरोमणि ऊधम सिंह की शहादत दिवस पर शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा आयोजित अखण्ड पाठ में प्रतिभाग किया व गुरूद्वारे में मत्था टेका प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरु साहिब और शहीद ऊधम सिंह को नमन करते हुए कहा कि यह समागम वीरता और पवित्रता का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा जब भी हम अमर शहीद ऊधम सिंह के त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति का स्मरण करते हैं तो हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास का एक अत्यंत दुखद और काला अध्याय था। शहीद ऊधम सिंह ने उस अन्याय का प्रतिकार किया और पूरी दुनिया के सामने भारत के स्वाभिमान, साहस और अदम्य संकल्प का परिचय दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा अमर शहीद ऊधम सिंह का जीवन हमें साहस, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देता है। उनका त्याग प्रत्येक भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना का संचार करता है तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कहा राष्ट्रभक्ति, सेवा, त्याग और मानवता की यह प्रेरणा हमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन वाणी से प्राप्त होती है। गुरु साहिब की शिक्षाएं मानवता, करुणा, सत्य, भाईचारे और निस्वार्थ सेवा का मार्ग प्रशस्त करती हैं। ये शिक्षाएं पूरे राष्ट्र को प्रेरित करने वाली हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के विकास में सिख समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि अमर शहीद ऊधम सिंह के आदर्शों को सदैव अपने हृदय में जीवित रखें तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें।

    इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री प्रदीप बत्रा, विधायक श्री अरविन्द पाण्डेय, श्री शिव अरोरा, श्री त्रिलोक सिंह चीमा, जिलाध्यक्ष भाजपा श्री कमल जिंदल, श्री मनोज पाल, मेयर श्री विकास शर्मा, श्री दीपक बाली, दर्जा राज्य मंत्री अनिल कपूर डब्बू, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में “एक लड़की की कहानी” नाटक और राजस्थान की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली ने छोड़ी गहरी छाप

    दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र में “एक लड़की की कहानी” नाटक और राजस्थान की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली ने छोड़ी गहरी छाप

    दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र एवं आसरा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित रंगकर्मी एवं लेखिका त्रिपुरारी शर्मा की स्मृति को समर्पित दो विशेष प्रस्तुतियों का आयोजन दून पुस्तकालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में एक ओर सामाजिक सरोकारों पर आधारित नाटक “एक लड़की की कहानी” का प्रभावशाली मंचन हुआ, वहीं दूसरी ओर प्रसिद्ध लोक कलाकार रामलाल भट्ट ने राजस्थान की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली कला का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत कर दर्शकों को लोकसंस्कृति की समृद्ध विरासत से परिचित कराया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ त्रिपुरारी शर्मा के रंगमंच और बाल नाट्य के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान को स्मरण करते हुए किया गया। उनके रचनात्मक व्यक्तित्व और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टि को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनाएँ आज भी समानता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा देती हैं।

    कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “एक लड़की की कहानी” नाटक रहा, जिसका मंचन आसरा ट्रस्ट के बच्चों ने अत्यंत सहज, प्रभावशाली और संवेदनशील अभिनय के साथ किया। नाटक में जन्म से लेकर शिक्षा, खेल, स्वतंत्रता, निर्णय लेने के अधिकार और जीवन के अवसरों तक लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। विशेष रूप से यह दिखाया गया कि सामाजिक असमानता केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि घर की बड़ी महिलाएँ भी परंपरागत सोच के प्रभाव में अनजाने में इस भेदभाव को आगे बढ़ाती रहती हैं। नाटक ने समाज के उस दोहरे चरित्र को भी उजागर किया, जहाँ सार्वजनिक मंचों पर बेटियों के सम्मान और समान अधिकारों की बातें की जाती हैं, जबकि व्यवहार में उन्हें बराबरी का अवसर नहीं दिया जाता। कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावी संवादों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया तथा उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

    इसके उपरांत वरिष्ठ लोक कलाकार रामलाल भट्ट ने राजस्थान की पारंपरिक धागे वाली कठपुतली कला का मनोहारी प्रदर्शन प्रस्तुत किया। उन्होंने अमर सिंह राठौड़ की प्रसिद्ध लोककथा से जुड़े पात्रों और विभिन्न पारंपरिक कठपुतलियों के माध्यम से इस प्राचीन लोककला की विशिष्टता, उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा कलात्मक सौंदर्य का जीवंत परिचय कराया। अपनी प्रस्तुति के दौरान उन्होंने बताया कि कठपुतली केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकइतिहास, लोकस्मृति और सांस्कृतिक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम भी रही है। उनकी प्रस्तुति को बच्चों, युवाओं और उपस्थित कला प्रेमियों ने भरपूर सराहा।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. बी. के. जोशी ने कहा कि भारत की लोककलाएँ हमारी सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की कठपुतली कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, लोकजीवन और सामाजिक चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति है। आगे उन्होंने कहा कि रामलाल भट्ट जैसे कलाकारों ने इस परंपरा को कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रखा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि “एक लड़की की कहानी” जैसा नाटक समाज में व्याप्त लैंगिक असमानताओं पर गंभीर प्रश्न उठाता है और समानता आधारित समाज के निर्माण का सशक्त संदेश देता है।

    कार्यक्रम के प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारीचन्द्रशेखर तिवारी ने सभागार में उपस्थित लोगों का अभिनंदन व स्वागत किया ।
    रंगकर्मी शिव सिंह नयाल ने त्रिपुरारी शर्मा के रंगकर्म, बाल नाट्य और सामाजिक सरोकारों पर आधारित सृजनात्मक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साहित्य, रंगमंच और लोककलाओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, संवाद और सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण तैयार करना भी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

    इस अवसर पर पुस्तकालयाध्यक्ष डी. के. पाण्डे, जयभगवान गोयल, सुन्दर सिंह बिष्ट, त्रिपुरारी शर्मा के पुत्र कबीर, गजेन्द्र नौटियाल, देवेन्द्र कुमार, हर्ष मणि भट्ट,जगदीश सिंह महर, रंगकर्मी मदन डुकलान, जनकवि डॉ.अतुल शर्मा, जगदम्बा मैठाणी, कृष्णा नौटियाल,विजय भट्ट, मदन सिंह बिष्ट सहित अनेक साहित्यकार, लेखक, रंगकर्मी, कला प्रेमी, शिक्षाविद्, युवा, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम के अंत में कलाकारों प्रति आभार प्रकट किया गया । सभागार में उपस्थित दर्शकों ने इस प्रकार के सार्थक सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कुल मिलाकर यह आयोजन सामाजिक संवेदनशीलता, लोकसंस्कृति के संरक्षण और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक सार्थक माध्यम सिद्ध हुआ, जिसने उपस्थित सभी दर्शकों के मन पर गहन छाप छोड़ी।

  • पुराने टिहरी शहर को दी श्रद्धांजलि, स्मृति दिवस पर जली दीपांजलि

    पुराने टिहरी शहर को दी श्रद्धांजलि, स्मृति दिवस पर जली दीपांजलि

    आधुनिकता की दौड़ में जहां लोग अपने अतीत को पीछे छोड़ते जा रहे हैं, वहीं कुछ प्रयास आज भी इतिहास और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में बल्लूपुर स्थित श्री सुबोध बहुगुणा द्वारा पुरानी टिहरी की याद में निर्मित प्रतिकृति पर 31 जुलाई को स्मृति दिवस मनाया गया।

    गौरतलब है कि 31 जुलाई 2004 को पुराने टिहरी शहर से अंतिम व्यक्ति के बाहर निकलने के साथ ही शहर पूरी तरह जलमग्न हो गया था। इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 31 जुलाई को स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    कार्यक्रम में प्रतिकृति के समक्ष राज्यमंत्री श्रीमती विनोद उनियाल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर पुराने टिहरी शहर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनों ने दीपांजलि अर्पित कर पुराने टिहरी की स्मृतियों को नमन किया तथा उसके इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर कांता बहुगुणा, इंदु बहुगुणा, विनोद बहुगुणा, प्राची जुयाल तथा अभिनव थापर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में 2024 बैच के भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह सम्पन्न, केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव रहे मुख्य अतिथि

    इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में 2024 बैच के भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह सम्पन्न, केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव रहे मुख्य अतिथि

    इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए), देहरादून में प्रशिक्षणरत 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा उन्होंने सफल परिवीक्षार्थियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।

    दीक्षांत समरोह में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें देश की एक प्रतिष्ठित अकादमी से तकनीकी एवं नेतृत्व संबंधी उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब ये अधिकारी अपने सेवा जीवन के सर्वश्रेष्ठ दौर में होंगे, तब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा होगा और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अधिकारियों के समक्ष जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण तथा मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ होंगी। इन चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार, आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा जनभागीदारी को समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल आँकड़ों के संग्रह एवं विश्लेषण तक सीमित न रहकर मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने में होना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि एक सफल लोकसेवक के लिए नैतिकता और कार्यकुशलता सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। उच्च नैतिक मूल्यों, समय के सदुपयोग तथा सीमित संसाधनों में अधिकतम परिणाम देने की क्षमता ही किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान बनाती है। उन्होंने अधिकारियों से केवल सक्षम प्रशासक बनने तक सीमित न रहकर प्रभावी नेतृत्व विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि त्याग, करुणा और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता ही एक अधिकारी को सच्चा नेता बनाती है। नेतृत्व का उद्देश्य केवल प्रशासन करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करना है।

    उन्होंने अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि एक अच्छा अधिकारी वही है जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो। उन्होंने अधिकारियों से आत्ममूल्यांकन और आत्मबोध को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक अधिकारी की जीवन यात्रा अलग होगी और उन्हें अपने अनुभवों से निरंतर सीखते हुए समाज एवं राष्ट्र की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देना होगा। अंत में उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं तथा उनके परिजनों को शुभकामनाएँ दीं।

    इससे पहले इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने निदेशक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि पूर्व में इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज और वर्तमान में इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी के रूप में यह संस्थान वर्ष 1938 से देश की सेवा कर रहा है। स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों तथा 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों ने अब तक इस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप संशोधित पाठ्यक्रम पर आधारित 20 माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के 2024 बैच के 109 परिवीक्षाधीन अधिकारियों तथा भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें से 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऑनर्स डिप्लोमा अर्जित किया।

    उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षीय अध्ययन के साथ-साथ वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, उन्नत प्रौद्योगिकी तथा नेतृत्व विकास पर विशेष बल दिया गया। कुल प्रशिक्षण अवधि का लगभग 45 प्रतिशत भाग देश के विविध पारिस्थितिक क्षेत्रों में आयोजित क्षेत्रीय अभ्यासों, अध्ययन भ्रमणों एवं साहसिक गतिविधियों को समर्पित रहा। परिवीक्षार्थियों ने विशेष वैकल्पिक पाठ्यक्रमों, स्वतंत्र शोध तथा वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक अभ्यासों में भी भाग लिया, जिसमें देश के अग्रणी संस्थानों का सहयोग एवं विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने पास आउट होने वाले अधिकारियों से पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए वनाश्रित समुदायों की आजीविका एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया।

    समारोह में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न पुरस्कार एवं पदक प्रदान किए गए। राजस्थान संवर्ग की सुश्री प्रतीक्षा नानासाहेब काले बैच की टॉपर रहीं। अन्य पुरस्कार एवं पदक विजेताओं की सूची पृथक रूप से संलग्न की गई है।

    दीक्षांत समारोह में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, चेयरमैन-सीईसी श्री सी.पी. गोयल, अपर वन महानिदेशक श्री संतोष तिवारी, अपर वन महानिदेशक श्री रमेश कुमार पाण्डेय, अपर सचिव श्री अमनदीप गर्ग, महानिदेशक, आईसीएफआरई श्रीमती कंचन देवी, निदेशक, आईजीएनएफए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया, अपर निदेशक, आईजीएनएफए श्री एन.सी. सरवणन, वन महानिरीक्षक डॉ. वी. क्लेमेंट बेन, निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान डॉ. जी.एस. भारद्वाज, निदेशक, एफआरआई सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, देहरादून स्थित वानिकी एवं अन्य संस्थानों के प्रमुख, आईजीएनएफए एवं केंद्रीय अकादमी राज्य वन सेवा के संकाय सदस्य एवं कर्मचारी, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी तथा 2024 बैच के पास आउट अधिकारियों के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  • मसूरी विधानसभा में कांग्रेस की चुनावी तैयारियां तेज, BLA-2 कार्यकर्ताओं को मिला प्रशिक्षण

    मसूरी विधानसभा में कांग्रेस की चुनावी तैयारियां तेज, BLA-2 कार्यकर्ताओं को मिला प्रशिक्षण

    मसूरी विधानसभा के अंतर्गत वार्ड संख्या 2, सिनौला गाँव स्थित ग्रीन व्यू वेडिंग पॉइंट में BLA-1 श्रीमती गोदावरी थापली एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता उपेंद्र थापली (बिल्लू भाई) की उपस्थिति में कांग्रेस के अधिकृत 178 BLA-2 कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में चुनाव कार्यालय से प्राप्त मतदाता सूची का मैपिंग के उपरांत सभी BLA-2 साथियों को वितरण किया गया। श्रीमती गोदावरी थापली ने बताया कि उनके अनुरोध पर उपजिलाधिकारी मसूरी द्वारा चुनाव आयोग के एक तकनीकी प्रतिनिधि (सुपरवाइज़र) की नियुक्ति की गई, जिन्होंने SIR प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान किया।

    बैठक के दौरान सभी BLA साथियों ने SIR अभियान के दौरान आ रही समस्याओं, शिकायतों और जमीनी चुनौतियों को विस्तार से साझा किया। श्रीमती संगीता जी ने सभी प्रश्नों का समाधान करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन दिया, जिससे कार्यकर्ताओं में स्पष्टता और आत्मविश्वास बढ़ा। इस अवसर पर उपेंद्र थापली (बिल्लू भाई) ने संगठन की मजबूती, बूथ स्तर पर सक्रियता और प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी पर विशेष जोर देते हुए सभी से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

    यह बैठक मसूरी विधानसभा की चुनावी तैयारियों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही। सभी कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने, मतदाता सूची को त्रुटिरहित करने तथा आगामी चुनावों के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। कांग्रेस का मजबूत बूथ संगठन ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, और मसूरी विधानसभा का प्रत्येक कार्यकर्ता इसी संकल्प के साथ जनसेवा एवं संगठन को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से जुटा हुआ है।