आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सेनेटरी नैपकिन के नाम पर कथित वसूली का आरोप, संगठन ने जताया विरोध

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से विभागीय अधिकारियों द्वारा सेनेटरी नैपकिन के नाम पर कथित रूप से जबरन धनराशि वसूले जाने का मामला सामने आया है। आंगनबाड़ी संगठन ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

संगठन का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पिछले कई वर्षों से विभाग की ओर से सेनेटरी नैपकिन के पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों द्वारा इन नैपकिनों को स्वच्छता के उद्देश्य से लोगों तक पहुंचाने और निर्धारित धनराशि में बेचने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिया जाता है। हालांकि, संगठन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इन नैपकिनों की बिक्री नहीं हो पा रही है और बड़ी संख्या में पैकेट बिना बिके रह जाते हैं।

आरोप है कि बिना बिके नैपकिन की राशि भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जमा कराने के लिए सुपरवाइजर और सीडीपीओ स्तर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि कार्यकर्ता पूर्व में भी इस संबंध में धनराशि जमा कर चुके हैं, लेकिन उन्हें जमा की गई राशि की कोई रसीद या स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया।

संगठन ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दोबारा सेनेटरी नैपकिन के पैकेट देकर उन्हें बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऐसे में जो नैपकिन बिक नहीं रहे हैं, उनकी राशि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने सीमित मानदेय से कहां से जमा करें।

संगठन ने विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि सेनेटरी नैपकिन की बिक्री का जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से हटाकर दुकानों अथवा संबंधित बिक्री केंद्रों को दिया जाए। यदि सरकार का उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों तक स्वच्छता संबंधी सुविधाएं पहुंचाना है, तो आंगनबाड़ी केंद्रों पर नैपकिन नि:शुल्क वितरित किए जाएं।

संगठन ने यह भी मांग की है कि जब तक पहले से उपलब्ध सेनेटरी नैपकिन की बिक्री नहीं हो जाती, तब तक किसी भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से उसकी राशि की वसूली न की जाए। साथ ही भविष्य में आंगनबाड़ी केंद्रों पर नैपकिन भेजने से पहले इसकी वितरण और बिक्री की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

संगठन ने चेतावनी दी कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक दबाव और कथित जबरन वसूली की व्यवस्था को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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