उत्तराखंड में बढ़ते अपराधों पर कांग्रेस नेता लालचंद शर्मा ने जताई चिंता, देहरादून में गैंगवार जैसे हालात का आरोप

​कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व महानगर अध्यक्ष (देहरादून) लालचंद शर्मा ने राजधानी देहरादून समेत उत्तराखंड में ताबड़तोड़ बढ़ रही आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता प्रकट की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की शांत वादियों में अब सुकून नहीं, बल्कि दहशत की गूंज सुनाई दे रही है। ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाने वाला यह राज्य तेजी से अपराध की राजधानी में तब्दील होता जा रहा है। राजधानी देहरादून से लेकर कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी तक, अपराधी बेखौफ होकर सरेआम गोलियां बरसा रहे हैं और हत्याएं कर रहे हैं। इन सब के बीच ऐसा लग रहा है कि पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। हाल ही में राजधानी देहरादून के व्यस्ततम और भीड़भाड़ वाले इलाके मच्छी बाजार में गुंजन नाम की युवती की बेरहमी से की गई हत्या की घटना ने सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
देहरादून के व्यस्ततम तिब्बती बाजार में 11 फरवरी को गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा की भाड़े के शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

दिनदहाड़े भीड़भाड़ वाले इलाके में अपराधियों का बेखौफ आना और वारदात को अंजाम देकर निकल जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है, जिससे जनता अब सड़कों पर निकलने में डर रही है। इस खौफनाक वारदात ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन ठोस कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं।
​वारदातों का यह सिलसिला केवल देहरादून तक सीमित नहीं है। कल कुमाऊं के हल्द्वानी शहर में हुए खौफनाक युवक युवती के ‘डबल मर्डर’ ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। जिस तरह से इस वारदात को अंजाम दिया गया, उसने आम नागरिकों के मन में असुरक्षा की भावना भर दी है। अपराधियों का हौसला इतना बुलंद है कि वे अब शहर के बीचों-बीच, दिनदहाड़े वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। आज ही देहरादून के राजपुर रोड पर सिल्वर सिटी मल्टीप्लेक्स में सरेआम एक हिस्ट्रीशीटर की भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई हत्या की घटना ने यह साफ कर दिया है कि देहरादून में अपराधियों के बीच ‘गैंगवार’ की स्थिति पैदा हो चुकी है। शहर के बीचों-बीच गोलियां चलना यह दर्शाता है कि बदमाशों को न तो खाकी का डर है और न ही कानून का। इसी के साथ, शहर के दूसरे हिस्सों में हत्या, डकैती और महिला अपराधों की बाढ़ सी आ गई है।
​सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह सब तब हो रहा है जब राजधानी देहरादून केवल एक शहर नहीं, बल्कि सामरिक और राष्ट्रीय महत्व का केंद्र है। यहाँ भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), वन अनुसंधान संस्थान (FRI), सर्वे ऑफ इंडिया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) जैसे महत्वपूर्ण केंद्रीय कार्यालय स्थित हैं। ऐसे अति-संवेदनशील और वीआईपी शहर में अगर अपराधी सरेआम कत्ल कर रहे हैं, तो यह केवल स्थानीय पुलिस की विफलता नहीं, बल्कि एक बड़ी सुरक्षा चूक है। क्या प्रशासन किसी बड़ी आतंकी या बाहरी साजिश का इंतजार कर रहा है?
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, कि “उत्तराखंड अब अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है। सरकार सो रही है और पुलिस सिर्फ वीआईपी ड्यूटी में व्यस्त है।
​उन्होंने ‘सघन सत्यापन अभियान’ की मांग की है। प्रदेश में बाहरी राज्यों से आकर बस रहे संदिग्ध लोगों की बाढ़ आ गई है। जनभावना को देखते हुए, हर किराएदार, रेहड़ी-पटरी वाले और बाहरी मजदूरों का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए। एलआईयू (LIU) को सक्रिय किया जाए और पुलिस अपना मुखबिर तंत्र मजबूत करे। ताकि ऐसी वारदातों की साजिश बनने से पहले ही उन्हें रोका जा सके। पुलिस गश्त, विशेषकर रिहायशी इलाकों और बाजारों में पीक ऑवर्स के दौरान, कागजों के बजाय जमीन पर दिखनी चाहिए। उत्तराखंड की सड़कों पर बहता खून और रोती हुई दीवारें चीख-चीख कर कह रही हैं कि ‘देवभूमि’ को अपराधियों की चारागाह मत बनने दीजिए। वरना उत्तराखंड की पहचान केवल ‘क्राइम रेट’ से जानी जाएगी। समय हाथ से निकल रहा है, और अगर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह हाथ से निकल जाएगी।

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