गरीबी, डर और खामोशी को तोड़कर मिली जीत : मासूम पीड़िता को एक माँ ने दिलाया इंसाफ

आज एक माँ होने के नाते मुझे अत्यंत गर्व की अनुभूति हो रही है। थाने से लेकर कोर्ट ताकि मैं उस बिटिया के साथ एक सहारे के रूप मे कदम कदम पर खड़ी रही व छोटी बच्चियों को पल पल हिम्मत दिलाई आज उसे 20 साल की कडी सजा हो पाई

लगभग तीन वर्ष पहले राजपुर रोड पर मेरी मुलाकात एक 14 वर्षीय बच्ची से हुई। उसने बहुत डरे-सहमे स्वर में अपनी 9 वर्षीय छोटी बहन की आपबीती सुनाई। उसने बताया कि उसका चचेरा भाई पिछले लगभग तीन महीनों से उसकी छोटी बहन ( 9 वर्षीय ) के साथ लगातार दुष्कर्म कर रहा है। परिवार अत्यंत गरीब था और भय व कानूनी जानकारी के अभाव में किसी से सहायता लेने का साहस नहीं जुटा पा रहा था।

यह सुनते ही मैंने तत्काल तत्कालीन एसएसपी श्री दिलीप कुँवर जी से संपर्क किया। इसके बाद मैं अपने पतिदेव श्री महेश पाठक, तथा श्री ज्ञान प्रकाश व्यास जी के साथ पीड़िता के घर पहुँची। लगातार तीन दिनों तक परिवार को समझाने और उनका विश्वास जीतने के बाद वे मेरी बात मानकर थाने चलने के लिए तैयार हुए।

मैं स्वयं पीड़िता और उसके परिवार को थाने लेकर गई और पूरी गंभीरता के साथ उनकी शिकायत दर्ज करवाई। यहाँ मैं स्पष्ट करना चाहूँगी कि पुलिस की कोई गलती नहीं थी। वास्तविक समस्या यह थी कि पीड़ित परिवार भय और सामाजिक दबाव के कारण थाने जाने से ही डर रहा था।

इस पूरे अभियान में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” की तत्कालीन महानगर संयोजिका श्रीमती मनीषा बहाल जी ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। मेरे पतिदेव श्री महेश पाठक तथा श्री ज्ञान प्रकाश व्यासजी ने अपने स्तर से मेहनत करके आवश्यक जानकारी पुलिस को उपलब्ध करवाई व योगदान दिया,जिससे पुलिस को जांच को मजबूती मिली।

पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए और लगभग 6 घंटे के अथक प्रयास के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उस समय आईपीएस श्री जितेन्द्र मेहरा जी के नेतृत्व में पुलिस ने अत्यंत संवेदनशीलता, तत्परता और पेशेवर ढंग से इस मामले को संभाला,

आज जब उस घटना को याद करती हूँ तो मन में संतोष होता है कि यदि हम समय पर किसी पीड़ित का हाथ थाम लें, उसका विश्वास बन जाए और समाज व प्रशासन मिलकर कार्य करें, तो न्याय अवश्य मिलता है।

हर बच्ची सुरक्षित रहे, हर पीड़ित को न्याय मिले और हर नागरिक अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का साहस करे — यही हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

तत्कालीन DIG / एसएसपी दिलीप कुंवरजी, श्रीमती मनीषा बहलजी व सर ज्ञान प्रकश व्यासजी को दिल से धन्यवाद व आभार

हनी पाठक

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