सावन महीने की संग्राद एवं भाई तारू सिंह जी का शहीदी पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। नितनेम के पश्चात हजूरी रागी भाई नरेन्द्र सिंह ने आसा दी वार का शब्द सतगुरु होइ दइआलु त सरधा पुरिऐ का शब्द गायन किया एवं संगतों के द्वारा जपु जी साहिब का मिलकर पाठ किया गया रखे गया । भाई शमशेर सिंह हैंड ग्रंथी ने कहा कि सुखी वनस्पति सावन की वरखा से हरी हो जाती है, प्रभु की भक्ति मन को शांत और सुखदाई करती है, भाई तारू सिह जी ने केसों की सम्हाल करते हुए अपनी खोपरी केसों के समेत उतरवा ली और सिख धर्म के लिए केसों की महत्व और भी पक्का किया ॥ कार्यकर्म में विशेष रूप से गुरुद्वारा साहिब जी के हजूरी रागी जत्थों भाई नरेन्द्र सिंह जी और भाई नरेंद्र सिंह ने सो सतिगुरु पिआरा मेरै नाल है जिथै किथै मैनो लए छडाई व सावणि सरसी कामणी चरन कमल सिउ पिआर का शब्द गायन किया।
हैंड ग्रंथी भाई शमशेर सिंह ने सरबत के भले के लिए अरदास की, प्रधान, गुरबख्श सिंह राजन जी व जनरल सेक्रेटरी गुलजार सिंह जी द्वारा संगतों को सावन महीने के की बधाई दी। मंच का संचालन दविदर सिंह भसीन ने किया। संगत के लिए लंगर की सेवा करने वाले तिलक राज कालरा जी,स.देविंदर सिंह सहदेव, रोबिन सिंह, मनजीत सिंह जी को सिरोपा भेट किया।
कार्यक्रम के पश्चात संगत ने गुरु का लंगर व प्रशाद ग्रहण किया। इस अवसर पर सरदार गुरबख्श सिंह राजन अध्यक्ष, गुलजार सिंह महासचिव, चरणजीत सिंह उपाध्यक्ष,मंजीत सिंह,गुरप्रीत सिंह जौली, सरदार सतनाम सिंह जी,अरविन्दर सिंह,देविंदर सिंह भसीन,दलबीर सिंह कलेर आदि उपस्थित रहे।

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