किच्छा में लोकतंत्र की मर्यादा तार-तार, विधायक पर हमला बेहद गंभीर: लालचंद शर्मा

किच्छा में नगर पालिका चुनाव के दौरान स्ट्रांग रूम के बाहर कांग्रेस विधायक श्री तिलक राज बेहड़ के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट की घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और चुनावी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष लालचंद शर्मा ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जिस तरह चुनाव जैसे संवेदनशील मौके पर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ अभद्रता और हाथापाई की स्थिति बनी, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।

लालचंद शर्मा ने कहा कि स्ट्रांग रूम जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की थी। इसके बावजूद स्थिति बिगड़ने देना और एक निर्वाचित विधायक के साथ कथित तौर पर मारपीट होने तक हालात पहुंच जाना प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि किच्छा में जो कुछ हुआ, वह केवल दो राजनीतिक पक्षों के बीच विवाद का मामला नहीं है। सवाल यह है कि जब स्ट्रांग रूम की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र मौजूद था, तब ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों होने दी गई?

लालचंद शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था में चूक किस स्तर पर हुई और विधायक के साथ कथित मारपीट करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और राजनीतिक संरक्षण के आधार पर किसी को भी कानून हाथ में लेने की छूट नहीं दी जा सकती।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की जांच और घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग करती है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

लालचंद शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड की जनता लोकतंत्र में विश्वास रखती है और चुनाव जीतने के लिए हिंसा, दबाव या भय का वातावरण स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार को सत्ता के प्रभाव से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के अनुसार शासन चलाना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य सरकार से मांग की कि किच्छा की घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चुनावी स्थलों पर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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