कांग्रेस पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल महिलाओं के आरक्षण का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना से जुड़ा हुआ था।
उन्होंने कहा, “यह महिलाओं के आरक्षण का नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सवाल था। हम किसी भी कीमत पर परिसीमन (Delimitation) को महिला आरक्षण से जोड़ने को स्वीकार नहीं कर सकते। यह स्पष्ट था कि इस स्वरूप में यह विधेयक पारित नहीं हो सकता। आज लोकतंत्र की बड़ी जीत हुई है।”
लालचंद शर्मा ने आगे कहा कि कांग्रेस ने इस “संविधान पर हमले” को लोकतांत्रिक तरीके से पराजित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक वास्तव में महिलाओं को अधिकार देने के बजाय भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक माध्यम था।
उन्होंने उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकताएं हमेशा संदिग्ध रही हैं।
लालचंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है, लेकिन इसे किसी भी राजनीतिक या संवैधानिक चाल के साथ जोड़ना देशहित में नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार बिना किसी शर्त और बिना परिसीमन से जोड़े महिला आरक्षण विधेयक को पुनः लाए और सभी दलों के साथ व्यापक सहमति बनाकर इसे पारित कराए।