आज दिनांक 1 जुलाई 2026 को राजकीय इंटर कॉलेज डोभालवाला के प्रेक्षागृह में अक्षयपात्र फाउंडेशन की ओर से कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के छात्र छात्राओं हेतु नए सत्र में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।
अक्षयपात्र फाउंडेशन की ओर से सर्वप्रथम वीरेश कुमार (क्लस्टर हेड), वीरेन्द्र दानू (सुपरवाइजर), श्रीमती प्रीति राणा (स्कूल रिलेशनशिप हेड) द्वारा मंचासीन सर्वश्री डॉ शरद चंद्र बडोनी (प्रधानाचार्य, राजकीय इंटर कॉलेज डोभालवाला), श्रीमती ममता उनियाल (प्रधानाध्यापिका, राजकीय प्राथमिक विद्यालय डोभालवाला), आनन्द सिंह रावत (पीटीआई एवं एमडीएम प्रभारी, राजकीय इंटर कॉलेज डोभालवाला), नीरज उनियाल (अध्यक्ष, गति संस्था), डॉ स्वामी एस चंद्रा (संस्थापक अध्यक्ष, शैल कला एवं ग्रामीण विकास समिति- पंजी.1988), का फूल मालाओं से स्वागत किया।
डॉ स्वामी एस चंद्रा ने अपने संबोधन में अक्षयपात्र द्वारा भोजन की गुणवत्ता पर बधाई दी तथा बच्चों के लिए स्वच्छ एवं प्रोटीन युक्त भोजन दिए जाने पर प्रशंसा जाहिर की।
प्रधानाचार्य डॉ शरद चंद्र बडोनी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुये बच्चों के लिए परोसे जाने वाले भोजन के बारे में कहा बहुत सुंदर और व्यवस्थित रूप से भोजन मिल रहा है।
क्लस्टर हेड वीरेश कुमार ने बताया कि किन प्रस्तुतियों में अक्षयपात्र फाउंडेशन बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करता है, उन्होंने बताया कि अभी तक कुल 440 विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था हो चुकी है तथा जल्दी ही अन्य स्थानों में भी फाउंडेशन अपना प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है जिसमें डोईवाला, ऋषिकेश, हल्द्वानी, श्रीनगर विशेष कर हैं।
स्कूल रिलेशनशिप हेड श्रीमती प्रीति राणा ने बच्चों से चर्चा करके अपनी मनपसंद के भोजन हेतु बात रखने के लिए कहा। तत्पश्चात सभी बच्चों को पुरस्कृत किया गया। सोशल इंटर्नशिप कराने वाले डॉ स्वामी एस चंद्रा से कहा कि सभी प्रशिक्षुओं को फाउंडेशन द्वारा संचालित राधा रसोई में भ्रमण करने हेतु निमंत्रण दिया।
एमडीएम प्रभारी आनंद सिंह रावत ने सभी प्रशिक्षुओं एवं बच्चों को भोजन करने एवं उसके प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा भोजन बड़ी परिश्रम से तैयार होता है इस लिए उसके महत्व को समझना चाहिए।
इस अवसर पर कक्षा 1 से 8 तक छात्र छात्राएं तथा सोशल इंटर्नशिप करने वाले यूपीईएस, देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी, आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी, डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ स्वामी एस चंद्रा ने किया।