भाकृअनुप-भा.मृ.ज.सं.सं. द्वारा 01 जुलाई, 2026 को “जलागम प्रबंधन हेतु मृदा एवं जल संरक्षण” विषय पर चार-सप्ताहीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (भाकृअनुप-भा.मृ.ज.सं.सं.), देहरादून द्वारा 01 जुलाई, 2026 को बी.टेक. विद्यार्थियों के लिए “जलागम प्रबंधन हेतु मृदा एवं जल संरक्षण” विषय पर चार-सप्ताहीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 01 जुलाई से 28 जुलाई, 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के मृदा एवं जल संरक्षण, जलागम प्रबंधन तथा सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल को सुदृढ़ करना है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 32 बी.टेक. विद्यार्थियों, जिनमें 19 छात्र एवं 13 छात्राएँ शामिल हैं, ने नामांकन कराया है। प्रतिभागी देश के प्रमुख कृषि अभियांत्रिकी संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिनमें कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना; कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार; डॉ. एन.जी. रंगा कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, बापटला, आंध्र प्रदेश; तथा महामाया कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अकबरपुर, उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ भाकृअनुप-भा.मृ.ज.सं.सं. के जल विज्ञान एवं अभियांत्रिकी प्रभाग के अध्यक्ष तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अम्बरीश कुमार के स्वागत संबोधन के साथ हुआ। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. कुमार ने मृदा अपरदन, जल की कमी, जलवायु अनुकूलता तथा सतत कृषि विकास से संबंधित चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक जलागम प्रबंधन के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें कक्षा व्याख्यान, प्रयोगशाला प्रदर्शन, क्षेत्रीय भ्रमण तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक मृदा एवं जल संरक्षण तकनीकों तथा जलागम नियोजन की उन्नत कार्यप्रणालियों से परिचित कराना है।

इस अवसर पर महामाया कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अकबरपुर, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाल तथा कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप भारद्वाज ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रशिक्षण हेतु चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें शैक्षणिक एवं व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय सहभागिता के माध्यम से इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. रमा पाल ने बताया कि इस चार-सप्ताहीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रतिभागियों को मृदा एवं जल संरक्षण के सिद्धांतों एवं व्यवहारिक पहलुओं, जलागम नियोजन एवं प्रबंधन, जल विज्ञान संबंधी प्रक्रियाओं, वर्षा जल संचयन, मृदा अपरदन नियंत्रण उपायों, जल संसाधन विकास, भू-स्थानिक अनुप्रयोगों तथा सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हेतु उभरती प्रौद्योगिकियों का गहन व्यावहारिक एवं तकनीकी अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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