उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद द्वारा आज शहीद स्थल पर आयोजित पत्रकार वार्ता का मुख्य उद्देश्य यह है कि उत्तराखंड के छूटे हुए आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण किया जाए और उन्हें सम्मान एवं उनके अधिकार मिलें। परिषद का स्पष्ट मत है कि चिन्हीकरण की प्रक्रिया को तकनीकी आधार पर लटकाया जाना अन्यायपूर्ण कृत्य है। यह प्रक्रिया संवेदनशील, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए।
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मुख्य मांगें
1. चिन्हीकरण की प्रक्रिया को कम से कम दो माह बढ़ाया जाए, ताकि छूटे हुए आंदोलनकारी अपने दस्तावेज एवं सत्यापन की व्यवस्था कर सकें।
2. चिन्हीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए। मानकों को इस प्रकार सरल बनाया जाए कि:
· अखबार की कतरनें, अथवा
· दो वरिष्ठ आंदोलनकारियों का सत्यापन
· आधार के रूप में स्वीकार किया जाए।
3. छूटे हुए उत्तराखंड आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर उन्हें सम्मान, प्रमाण पत्र एवं शासन की योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।
4. चिन्हीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। सूची प्रकाशित की जाए और आपत्ति/सुनवाई का समुचित अवसर दिया जाए।
5. तकनीकी कारणों का हवाला देकर आवेदनों को निरस्त या लंबित न रखा जाए। आंदोलनकारियों के योगदान का सम्मान राज्य की नैतिक जिम्मेदारी है।
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आगामी कार्यक्रम
· 2 अक्टूबर 2026: मुजफ्फरपुर काण्ड एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर शहीद स्थल पर धरना तथा जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषण।
· 9 नवम्बर 2026: चिन्हीकरण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच।
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पृष्ठभूमि
आंदोलनकारी संयुक्त परिषद वर्षों से छूटे हुए आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण, उनके सम्मान एवं पुनर्वास के मुद्दे पर संघर्षरत है। परिषद का मानना है कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण में जिन आंदोलनकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, उनमें से अनेक आज भी चिन्हीकरण की प्रक्रिया में छूट गए हैं। इन छूटे हुए आंदोलनकारियों को सम्मान न मिलना उनके त्याग और बलिदान के साथ अन्याय है।
चिन्हीकरण के मानकों को अत्यधिक तकनीकी और कठोर बनाया जाना इस समस्या का प्रमुख कारण है। कई वरिष्ठ आंदोलनकारी और उनके परिवार आज भी अभिलेखों के अभाव में चिन्हीकरण से वंचित हैं। ऐसे में अखबार की कतरनें, पुराने फोटो, संगठनात्मक अभिलेख, जेल/मुकदमा संबंधी दस्तावेज तथा दो वरिष्ठ आंदोलनकारियों का सत्यापन जैसे सरल आधार स्वीकार किए जाने चाहिए।
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परिषद की प्रमुख पुरानी कार्यवाहियां
उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद द्वारा अब तक किए गए प्रमुख प्रयासों में निम्न कार्यवाहियां शामिल रही हैं:
1. छूटे हुए आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु समय-समय पर शासन, प्रशासन एवं चिन्हीकरण समिति को ज्ञापन एवं अभ्यावेदन प्रेषित करना।
2. शहीद स्थल पर धरना, प्रदर्शन, सभा एवं पत्रकार वार्ताओं के माध्यम से मुद्दे को निरंतर उठाना।
3. जिलाधिकारी, मुख्यमंत्री एवं संबंधित विभागों को आंदोलनकारियों की समस्याओं से अवगत कराना।
4. आंदोलनकारियों के दस्तावेजीकरण एवं सत्यापन हेतु जनसंपर्क अभियान चलाना।
5. वरिष्ठ आंदोलनकारियों के साथ बैठकें कर उनके अनुभव, अभिलेख एवं सत्यापन को संगठित करने का प्रयास करना।
6. विधायकों, सांसदों एवं जनप्रतिनिधियों के माध्यम से चिन्हीकरण प्रक्रिया में सुधार की मांग करना।
7. समाचार पत्रों, सोशल मीडिया एवं जनसंपर्क के माध्यम से छूटे आंदोलनकारियों की आवाज जनता तक पहुंचाना।
8. समय-समय पर मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय एवं संबंधित कार्यालयों तक कूच एवं प्रतिनिधिमंडल भेजकर मांगों को प्रबलता से रखना।
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परिषद का रुख
उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद उक्त मुद्दे पर वर्षों से संघर्षरत है और आगे भी संघर्ष करती रहेगी। परिषद का स्पष्ट कहना है कि छूटे हुए आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनके त्याग, बलिदान और सम्मान का प्रश्न है। इसे राजनीतिक स्वार्थ, तकनीकी अड़चनों या लालफीताशाही की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता।
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जनता एवं शासन से अपील
हम सभी जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, मीडिया एवं आम जनता से अपील करते हैं कि छूटे हुए उत्तराखंड आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण एवं सम्मान का मुद्दा संवेदनशीलता से लिया जाए। चिन्हीकरण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, जिससे कोई भी वास्तविक आंदोलनकारी सम्मान से वंचित न रहे।
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जनहित में जारी
उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद
संपर्क: परिषद कार्यालय / मीडिया प्रकोष्ठ
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📌 मीडिया के लिए मुख्य बिंदु (एक नज़र में)
· छूटे आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण प्रमुख मुद्दा
· चिन्हीकरण प्रक्रिया में 2 माह की वृद्धि की मांग
· अखबार की कतरनें व 2 वरिष्ठ आंदोलनकारियों का सत्यापन आधार के रूप में स्वीकार्य हो
· प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित हो
· 2 अक्टूबर 2026: धरना एवं ज्ञापन
· 9 नवम्बर 2026: मुख्यमंत्री आवास कूच
पत्रकार वार्ता में संरक्षक बालेश बबानिया, अध्यक्ष सुरेश कुमार महिला अध्यक्ष प्र मिला रावत,, सत्या पोखरियाल, अनन्त आकाश, चिन्तन सकलानी, प्र भात डण्डरियाल, सुभागा फर्सवाण,विकास रावतरामपाल,पुष्पलता वैश्य, राजदुलारी लोधी, कल्पेश्वरी नेगी, एकादशी देवी, मीरा गुंसाई, भवानी नेगी, राजेश्वरी रावत, यशोदा रावत आदि आन्दोलनकारी शामिल थे!