लोकायुक्त की तत्काल नियुक्ति की मांग को लेकर 14 संगठनों ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से उत्तराखंड के 14 सामाजिक संगठन एवं राजनीतिक संगठनों के द्वारा उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति को प्रेषित किया गया है ! संगठनों के द्वारा कहा गया कि
उत्तराखंड में आज भ्रष्टाचार केवल एक आरोप नहीं बल्कि एक गंभीर जनसमस्या भी बन चुका है। छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े पदों तक, जनता की बार-बार यह शिकायत रहती है कि उनकी सुनवाई नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती।
लोकायुक्त इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सरकार से स्वतंत्र एक ऐसी संस्था है, जो मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और उच्च अधिकारियों तक की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर सकती है। जब जांच सरकार के अधीन होती है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठता है, लेकिन लोकायुक्त उस दबाव से मुक्त होता है। वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप चमोली ने उत्तराखंड में लोकायुक्त का न होना राज्य के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है, जहां संसाधन पहले से ही सीमित हैं। ऐसी स्थिति में यदि भ्रष्टाचार पर सख्त और प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो यह राज्य के विकास, जनता के अधिकारों और भविष्य—तीनों के लिए घातक सिद्ध होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना लोकायुक्त के भ्रष्टाचार बेलगाम होता है और जवाबदेही समाप्त हो जाती है। इसलिए राज्यहित में पूर्णतः स्वतंत्र, पारदर्शी और सशक्त लोकायुक्त की तत्काल स्थापना आवश्यक है,
पर दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई यह है
जब तक लोकायुक्त सक्रिय नहीं होगा, तब तक न पारदर्शिता आएगी और न ही भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी। इसलिए आज उत्तराखंड की सबसे बड़ी जरूरत है—लोकायुक्त की तत्काल और स्वतंत्र नियुक्ति।”
ज्ञापन देने वालों पहाड़ स्वाभिमान सेना से पंकज उनियाल, उत्तराखंड क्रांति सेना से ललित श्रीवास्तव, देवभूमि युवा संगठन अध्यक्ष आशीष नौटियाल, गढ़ कुमाऊं एलायंस अध्यक्ष कनिष्क जोशी, क्षत्रिय महासभा अध्यक्ष राकेश नेगी, पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति अध्यक्ष नमन चंदोला, जय संविधान संगठन अध्यक्ष विकास कुमार, नेताजी सुभाष चंद्र समिति अध्यक्ष प्रभात डंडरियाल, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा प्रमोद काला, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता कमल कांत, एडवोकेट हरिंदर बेदी, नवनीत कुकरेती, प्रिंस शर्मा, एडवोकेट कृति बिष्ट, एडवोकेट सुनीता चौहान, एडवोकेट भारती भंडारी, एडवोकेट स्वाति शर्मा आदि कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे

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