उत्तराखंड संस्कृत संस्थान, हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित षोडश संस्कार प्रयोगात्मक कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को भारतीय वैदिक परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण संस्कारों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला के दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा उपनयन, वेदारंभ, विवाह एवं समावर्तन संस्कार की विधियों का विस्तारपूर्वक प्रदर्शन कर प्रतिभागियों को उनका अभ्यास कराया गया।
कार्यक्रम में आचार्य विशाल भट्ट एवं आचार्य पंकज बहुगुणा ने बताया कि भारतीय संस्कृति में षोडश संस्कार मानव जीवन को संस्कारित, अनुशासित और आध्यात्मिक बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उपनयन संस्कार के माध्यम से बालक को वेदाध्ययन के लिए दीक्षित किया जाता है, जबकि वेदारंभ संस्कार ज्ञानार्जन की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। इसी प्रकार विवाह संस्कार को गृहस्थ जीवन की पवित्र स्थापना तथा समावर्तन संस्कार को शिक्षा पूर्ण होने के उपरांत सामाजिक उत्तरदायित्व ग्रहण करने का संकेत माना गया है।
कार्यशाला में उपस्थित प्रशिक्षकों ने मंत्रोच्चारण, पूजन विधि तथा प्रत्येक संस्कार की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को भी स्पष्ट किया। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक इन संस्कारों की प्रक्रियाओं को सीखा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यशाला के संयोजक सुभाष जोशी ने बताया कि इस प्रकार की प्रयोगात्मक कार्यशालाएँ नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने तथा वैदिक संस्कारों के व्यावहारिक ज्ञान को समाज तक पहुँचाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही हैं। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर संयोजक सुभाष जोशी नोडल अधिकारी मनोज शर्मा , श्री महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा योगेश सकलानी विनय प्रजापति, बालकृष्ण शर्मा आदि सैकड़ों प्रशिक्षु उपस्थित थे ।