तिब्बत के स्वतंत्रता संघर्ष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अध्याय है।
यह दिवस उन बहादुर तिब्बती महिलाओं के साहस, त्याग और बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है जिन्होंने 12 मार्च 1959 को तिब्बत की राजधानी Lhasa में एक जुट होकर दमनकारी, क्रूर चीनी शासन के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसको अनंतकाल तक याद रखा जाएगा।
इस शांतिपूर्ण जन आंदोलन पर बर्बरता से
गोलियां चलाईं गयी, हजारों निर्दोष तिब्बती नागरिकों की निर्ममता से हत्या कर दी गई।
इन घटनाओं के बाद तिब्बत के आध्यात्मिक नेता एवं गुरु परम पूजनीय दलाई लामा जी और हजारों तिब्बती लोगो को तिब्बत देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी।
आज 12 मार्च को तिब्बती महिला राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस के कार्यक्रम का आमंत्रण जो श्रीमती कारकी डोलमा एवं श्रीमती सोनम द्वारा दिया गया, इस निमित्त देहरादून परेड ग्राउंड, देहरादून में, कर्नल अजय कोठियाल, सरदार इन्द्रपाल सिंह कोहली, श्री राकेश कपूर तथा वरिष्ठ भाजपा नेता श्री भगवती प्रसाद जी के सम्मिलित हुए।
इस कार्यक्रम में तिब्बती बहनों और समस्त श्रोताओं का जोश देखने लायक था – तिब्बत देश की स्वतंत्रता, चीन से पूर्ण मुक्ति के भाव, विश्वास इत्यादि।
हम अपने तिब्बती भाइयों – बहनों के साथ सदैव खड़े हैं और तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए चल रहे “आजाद तिब्बत” Free Tibet के आंदोलन के साथ हमारी एक जुटता हमेशा बनी रहेगी।
जय हिन्द – जय तिब्बत।