कैंट विधायक सविता कपूर ने विधानसभा में उठाई दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की बात, राज्य में पृथक ‘दिव्यांग निदेशालय’ और ‘आयुक्त’ की नियुक्ति का रखा प्रस्ताव

देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती सविता कपूर ने विधानसभा सत्र के दौरान ‘नियम 300’ के अंतर्गत प्रदेश के दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनके सर्वांगीण विकास का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय सदन के पटल पर रखा। उन्होंने धामी सरकार की संवेदनशील नीतियों की सराहना करते हुए दिव्यांगजनों को विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का सुझाव दिया।
विधायक सविता कपूर ने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष हो रहे हैं, और इन वर्षों में प्रदेश ने विकास के कई आयाम छुए हैं। इसी विकास यात्रा में हमारे दिव्यांग भाई-बहनों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, अन्य राज्यों की तर्ज़ पर उत्तराखंड में भी एक अलग ‘दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग’ का गठन किया जाना चाहिए।
उन्होंने सदन में बताया कि लंबे समय से प्रदेश के दिव्यांगजनों द्वारा ‘दिव्यांग आयुक्त’ की नियुक्ति की आवश्यकता महसूस की जा रही है। एक पृथक निदेशालय और आयुक्त की व्यवस्था न होने से दिव्यांगजनों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन में जो थोड़ी-बहुत तकनीकी कठिनाई आ रही है, उसे इस नई व्यवस्था से पूरी तरह दूर किया जा सकता है।
विधायक श्रीमती कपूर ने माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी की संवेदनशील कार्यशैली पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा, “हमारी सरकार हमेशा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी संवेदनशील सरकार दिव्यांगजनों के हित में शीघ्र ही ‘दिव्यांग निदेशालय’ स्थापित करने और ‘दिव्यांग आयुक्त’ की नियुक्ति करने पर सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि हमारे दिव्यांग भाई-बहन भी पूरी तरह सशक्त होकर ‘विकसित उत्तराखंड’ के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे सकें।”
कैंट विधायक के इस कदम की क्षेत्र के साथ-साथ पूरे प्रदेश के दिव्यांगजनों और सामाजिक संगठनों ने भी भारी प्रशंसा की है।

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