उत्तराखंड संस्कृत संस्थान हरिद्वार के द्वारा आयोजित षोडश संस्कार प्रशिक्षण कार्यशाला के चतुर्थ दिवस पर चूड़ाकर्म संस्कार तथा विद्यारंभ संस्कार का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में उपस्थित प्रशिक्षकों ने इन संस्कारों की वैदिक परंपरा, आध्यात्मिक महत्व तथा वैज्ञानिक पक्षों को विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षण के दौरान चूड़ाकर्म संस्कार की विधि, उसके मंत्रों तथा उसके सांस्कृतिक महत्व का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया। बताया गया कि चूड़ाकर्म संस्कार बालक के शारीरिक एवं मानसिक शुद्धिकरण तथा उत्तम संस्कारों के विकास का प्रतीक माना जाता है।
इसके पश्चात विद्यारंभ संस्कार का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि यह संस्कार बालक के जीवन में शिक्षा के शुभारंभ का प्रतीक है, जिसमें गुरु के मार्गदर्शन में बालक को अक्षर ज्ञान कराया जाता है। इस अवसर पर उपस्थित प्रशिक्षार्थियों को विधि-विधान के साथ संस्कारों का अभ्यास भी कराया गया।
कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों ने अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता की तथा वैदिक संस्कारों के संरक्षण और प्रसार के लिए संकल्प व्यक्त किया। अंत संयोजक सुभाष जोशी एवं सहसंयोजक/नोडल अधिकारी मनोज शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और आगामी दिवस के कार्यक्रमों की जानकारी दी।आचार्य विशाल मणि भट्ट आचार्य पंकज आचार्य अंकित बहुगुणा योगेश सकलानी बजरंग दल से विकास वर्मा महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा विनय प्रजापति आदि प्रशिक्षु उपस्थित थे ।