चम्पावत प्रकरण को लेकर देहरादून में प्रदर्शन बीजेपी पर बच्चियों का हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप

चम्पावत में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप का मुकदमा दर्ज होने और उसके बाद के घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए उत्तराखंड महिला मंच ने अन्य सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर देहरादून के गांधी पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इस पूरे प्रकरण को संदिग्ध बताया और बीजेपी नेताओं पर नाबालिग बच्चियों को अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए हथियार बनाने का आरोप लगाया।

महिला मंच की कमला पंत ने कहा कि बीजेपी सरकार अपने लोगों के मामले में लीपापोती करती रही है। अंकिता के मामले में आज तक लीपापोती की जा रही है। वीआईपी का आज तक पता नहीं चला है। चम्पावत के मामले में कुछ ही घंटों ने पुलिस इस नतीजें पर पहुंच गई कि मामला फर्जी है। जो बच्ची एक कमरे में निर्वस्त्र और रस्सी से बंधी हुई पुलिस को मिली, उसी के पिता को नजरबंद किया गया। और जब घटना का खुलासा करने की बात आई तो सीएमओ तक को सफाई देने के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के ट्रेेेक रिकॉर्ड लीपापोती का रहा है।

महिला मंच की निर्मला बिष्ट ने कहा कि यदि पुलिस की कहानी सच भी हो तो भी यह सवाल है कि बीजेपी के लोग अपनी अंदरूनी लड़ाई में हमारी बच्चियों का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, पुलिस उन पर क्यों कार्रवाई नहीं कर रही है। इस पूरे मामले में बहुत कुछ है, जो संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि हाल में राज्य में कई ऐसे मामले आये हैं, जिनमें महिला अपराधों में बीजेपी के लोग शामिल रहे हैं। संचालन करते हुए उत्तराखंड इंसानियत मंच के त्रिलोचन भट्ट ने कहा कि पुलिस जिस कमल रावत को साजिशकर्ता बता रही है, वह भी नाबालिग के रेप के मामले में जेल में बंद रहा और हाई कोर्ट से रिहा हुआ। उस समय पुलिस ने नहीं कहा कि मामला फर्जी है और न ही हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की।

 

प्रदर्शनकारियों को ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, सुजाता पॉल, स्वाति नेगी, विमला कोली, गीतिका, ऊमा भट्ट, विजय भट्ट, मनीष केडियाल, आदि ने भी संबोधित किया। सभी ने राज्य में महिलाओं पर हो रहे अपराधों पर गंभीर चिन्ता जताई और इस लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होने की अपील की। इस मौके पर , प्रो. राघवेन्द्र, डॉ. रवि चोपड़ा, ईश्वर पाल शर्मा, पद्मा गुप्ता, विजय नैथानी, सहित कई लोग शामिल थे।

उधर वहीं नए घटनाक्रम

के परिप्रेक्ष्य में , उत्तराखंड महिला मंच की ओर से वक्तव्य जारी कर कहा गया है कि-

शिकायत कर्ता पिता को और बेटी जिसको वही पुलिस जिसने उसे कमरे में बंद पैरों में रस्सियों से बाँधा हुआ निर्वस्त्र पाया , अब उसी पुलिस के अधिकारी इस बलात्कार कांड को फर्जी बता रहे हैँ I

C M O खुद मेडिकल में बलात्कार न होने का बयान देने सामने आ रहे हैं l बलात्कारियों के खिलाफ कोर्ट में मुक़दमा दायर करने की जगह उल्टे दो दिनों तक पिता पुत्री को नजर बंद किए रहे, बिना न्यायिक जांच प्रक्रिया शुरू कराएं, उनको ललचाने डराने धमकाने के बाद जो मनमर्जी बेटी से कहलवा कर , जिस तेजी से इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास सरकार ने खुद और अपनी मशीनरी के जरिए किया है, उसने इस सरकार के चाल चरित्र और चेहरे को और भी खुल कर स्पष्ट कर दिया है l

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