सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत छोटे दुकानदारों और मध्यवर्गीय लघु व्यवसायियों की दुकानें ढहाए जाने के विरोध में सीपीएम ने महामहिम राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश, महामहिम राज्यपाल, मुख्य सचिव, जिलाधिकारी देहरादून, उपाध्यक्ष एमडीडीए तथा पर्यटन एवं खाद्य सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों को ज्ञापन सौंपकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए केवल छोटे दुकानदारों पर ही कार्रवाई कर रही है, जबकि आवासीय कालोनियों, बड़े होटलों, रिसोर्ट्स और व्यावसायिक केंद्रों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। पार्टी का कहना है कि पहले भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें बड़े होटलों और रिसोर्ट्स द्वारा नाले-खाले पर कब्जा रखने का मामला उठाया गया था, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई के बजाय गरीब बस्तियों में बुलडोजर चलाए गए।
सीपीएम ने आरोप लगाया कि अब सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर गरीब और मध्यवर्गीय लोगों की दुकानें ढहाई जा रही हैं, जिससे लघु व्यवसायियों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। पार्टी ने मांग की है कि गरीब और मध्यवर्गीय लघु व्यवसायियों को यथावत रूप से अपना रोजगार करने की अनुमति दी जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि आवासीय कालोनियों में अशांति फैला रहे बड़े होटलों, होम-स्टे, पीजी तथा बड़े व्यवसायियों के खिलाफ सख्ती से रोक लगाई जाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि एमडीडीएपर्यटन तथा कुछ अन्य विभागों द्वारा इन होटलों को एनओसी जारी की गई है, जिसकी भी जांच होनी चाहिए।
सीपीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि बड़े व्यवसायियों और होटल संचालकों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जाए तथा छोटे दुकानदारों और लघु व्यवसायियों को संरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि उनके रोजगार और आजीविका पर अनुचित प्रभाव न पड़े।