दून मेडिकल कॉलेज में पेट के कैंसर की जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सफल, 70 वर्षीय मरीज को मिला नया जीवन

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, देहरादून के सर्जरी विभाग में उत्तरकाशी के निवासी 70 वर्षीय श्री बच्चन सिंह को पेट के कैंसर (कार्सिनोमा स्टमक) के लिए सफलतापूर्वक लैप्रोस्कोपिक डिस्टल गैस्ट्रेक्टॉमी विद गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी शल्यक्रिया द्वारा उपचारित किया गया।

रोगी पिछले कुछ महीनों से भूख में कमी, वजन कम होना, पेट में दर्द एवं भोजन के बाद असहजता जैसी समस्याओं से पीड़ित थे। विभिन्न जांचों, जिनमें एंडोस्कोपी एवं बायोप्सी शामिल थीं, के आधार पर उन्हें पेट के निचले भाग का कैंसर होने की पुष्टि हुई। रोग की अवस्था का विस्तृत मूल्यांकन करने के पश्चात ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

मरीज का इलाज सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अभय कुमार और उनकी टीम के अंतर्गत किया गया। मरीज का इलाज अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक सिस्टम का उपयोग करते हुए किया गया जिसमें स्पाई कंट्रास्ट, ओवरले और कलर सेगमेंटल फ्लोरोसेंस जैसे नए टेक्नोलॉजी शामिल थे। ऑपरेशन से पूर्व एंडोस्कोपी द्वारा कैंसर के इलाके में इंडोशियनिन ग्रीन डाई डाली गई जिससे ऑपरेशन की सटीकता और ज्यादा बढ़ गई। यह ऑपरेशन लगभग ९ घंटे में पूरा किया गया। पेट के कैंसरग्रस्त भाग को सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया तथा भोजन के सामान्य मार्ग को पुनर्स्थापित करने हेतु छोटी आंत को शेष पेट से जोड़कर गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी की गई। ऑपरेटिंग टीम में डॉ अभय कुमार और उनके रेजिडेंट डॉ दिव्यांशु, डॉ ईश्विंद्र, डॉ वैभव, डॉ मयंक, डॉ हिमांशु और डॉ वैष्णवी शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम से सह आचार्य डॉ अभिमन्यु के साथ डॉ साक्षी और डॉ मानसी शामिल थे।

पेट के कैंसर की लैप्रोस्कोपिक शल्यक्रिया अत्यंत जटिल एवं तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। ऑपरेशन के दौरान कैंसरग्रस्त भाग को पर्याप्त सुरक्षा सीमा के साथ निकालना, आसपास की रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखना तथा आवश्यक लिम्फ नोड्स की व्यापक सफाई करना अत्यधिक कौशल की मांग करता है। इसके अतिरिक्त पेट एवं छोटी आंत के बीच नया जोड़ बनाना भी एक महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें उच्च स्तर की शल्य दक्षता आवश्यक होती है।

लैप्रोस्कोपिक पद्धति से किए गए इस ऑपरेशन के परिणामस्वरूप रोगी को कम दर्द, कम रक्तस्राव, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ एवं अस्पताल में कम समय तक रहने जैसे लाभ प्राप्त हुए। वर्तमान में रोगी की स्थिति संतोषजनक है तथा वे तेजी से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन एवं सर्जरी विभाग ने इस सफलता को संस्थान में उपलब्ध उन्नत कैंसर शल्य चिकित्सा सेवाओं का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है तथा जनता से अपील की है कि पेट संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *