भाजपा को बदनाम करने के लिए कांग्रेस राजनैतिक साजिश में जुटी : भट्ट

भाजपा ने चम्पावत की घटना को लेकर कांग्रेस पर राजनैतिक दुर्भावना से झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा, जिस तरह बिना किसी जांच और सबूत के इस संवेदनशील घटना में पार्टी कार्यकर्ता को मुजरिम साबित करने की कोशिश की गई वह शर्मनाक है। इस घटना और इससे पूर्व अरविंद पांडेय प्रकरण में जिस तरह गोदियाल ने तत्काल झूठ फैलाने और हंगामा करने का प्रयास किया, उससे उनकी राजनैतिक महत्वाकांक्षा के षडयंत्र की बू आती है। वहीं उन्होंने कांग्रेस नेताओं को अपने इस कृत्य के लिए प्रदेश की जनता से सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है।

अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने आक्रोश जताया कि सिर्फ और सिर्फ राजनैतिक लाभ के लिए कांग्रेस नेताओं ने इस घटना के माध्यम से भाजपा को टारगेट करने की साजिश की गई। जबकि आज पुलिस की शुरुआती जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से स्पष्ट हो गया है कि तथाकथित पार्टी कार्यकर्ता का घटना से कोई लेना देना नहीं था और उसे बदला लेने के लिए फंसाया गया था। अब यह बात शीशे की तरह साफ हो गई है कि किस तरह कांग्रेस पार्टी आपराधिक घटनाओं में राजनैतिक साजिश के तहत भाजपा को बदनाम करने की कोशिश में लगी है।

उन्होंने कहा कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि कांग्रेस राजनैतिक लाभ के लिए किसी निर्दोष के जीवन को दांव पर लगा सकती है, बस उसका संबंध भाजपा से होना चाहिए। उन्हें न तो किसी मातृ शक्ति की छवि खराब होने की चिंता है और न ही देवभूमि की।

वहीं उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेताओं को अपने शर्मनाक और षड्यंत्रकारी रुख के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। अन्यथा महिला अधिकारों की अपराधी कांग्रेस पार्टी को प्रदेश की जनता अपनी बहिन बेटियां के चरित्र से खेलने की कोशिश के लिए कभी माफ नहीं करने वाली है। यही रवैया रहा तो कांग्रेस का चुनावों में जीतना तो दूर, सामाजिक भागेदारी करना भी मुश्किल हो जाएगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में जिस तरह कल सबसे पहले गणेश गोदियाल ने वीडियो जारी किया। आज कांग्रेस ने हंगामा काटा, कहीं इस षड्यंत्र के पीछे कांग्रेस भी तो नहीं है। क्योंकि इससे पहले अरविंद पांडे वाले मामले में भी गणेश गोदियाल ने जरूरत से ज्यादा तेजी दिखाई। राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा के कारण गोदियाल इस निम्न स्तर पर उतर आये, विश्वास नहीं होता।

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