उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री लालचंद शर्मा ने भाजपा द्वारा देश और प्रदेश में निकाली जा रही ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता में बैठी पार्टी का लोकतंत्र बचाने की बात करना अपने आप में हास्यास्पद है। जब केंद्र और प्रदेश दोनों में भाजपा की सरकार है, तो जनता यह जानना चाहती है कि आखिर भाजपा लोकतंत्र को किससे बचाने की बात कर रही है?
श्री शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना सत्ताधारी दल की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। भाजपा को यात्रा निकालकर लोकतंत्र बचाने का दिखावा करने के बजाय अपने शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों, जनता के अधिकारों और विपक्ष की आवाज का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए। लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और सत्ता में बने रहने का नाम नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही, असहमति का सम्मान और सरकार से सवाल पूछने की स्वतंत्रता ही लोकतंत्र की असली पहचान है।
उन्होंने कहा कि जब विपक्ष जनता के मुद्दों को उठाता है और सरकार से सवाल पूछता है, तो उसका जवाब देने के बजाय भाजपा लोकतंत्र बचाने की यात्रा निकाल रही है। भाजपा को बताना चाहिए कि महंगाई, बेरोजगारी और जनता से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण सवालों पर उसकी सरकार क्या जवाब दे रही है? लोकतंत्र नारों और यात्राओं से नहीं, बल्कि अपने आचरण और कार्यशैली से मजबूत होता है।
श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र की चिंता करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनता की आवाज सुनी जाए, विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिले और सरकार अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करे। लोकतंत्र किसी राजनीतिक दल की जागीर नहीं, बल्कि देश की जनता का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाने की यात्रा निकालने से पहले भाजपा को अपने शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करके दिखानी चाहिए। जनता सब देख रही है और वह राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज और जवाबदेही से अपना निर्णय करती है।