SIR में विलोपित मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 की अनिवार्यता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, निर्वाचन अधिकारी से विसंगतियां दूर करने की मांग - hindikhabar24x7.com

SIR में विलोपित मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 की अनिवार्यता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, निर्वाचन अधिकारी से विसंगतियां दूर करने की मांग

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र के उत्तर के प्रत्युत्तर में निर्वाचन विभाग की कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल उठाते हुए एसआइआर की विसंगतियों को दूर किये जाने की मांग की है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे पत्र में लालचन्द शर्मा ने उनके कार्यालय के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि आपके कार्यालय द्वारा जारी पत्र संख्या 1800/ग्ग्ट -25/2025 दिनांक 08 अक्टूबर, 2026 के माध्यम से हमारी पूर्व आपत्ति पर जो स्पष्टीकरण दिया गया है उसका संज्ञान लिया गया। अत्यंत खेद का विषय है कि आयोग ने हमारी मूल और बुनियादी वैधानिक आपत्ति का कोई ठोस व स्पष्ट विधिक निवारण प्रस्तुत नहीं किया है। हम इस पत्र के माध्यम से पुनः केवल अपनी मूल विधिक आपत्ति पर आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए कड़ा विरोध दर्ज करते हैंः

1- घोषणा के बिंदु का सीधा विरोधाभासः- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित फार्म-6 (प्ररूप-6 की आधिकारिक संरचना के अंतर्गत ’’घोषणा’’ के बिंदु संख्या बिंदु संख्या में आवेदक से यह अनिवार्य विधिक शपथ मांगी जाती है किः मैं निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए पहली बार आवेदन कर रहा हूंः-
2- पूर्व मतदाताओं से असत्य विधिक घोषणा करवाना कानूनन गलतः जिन मतदाताओं के नाम हाल ही में संपन्न एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर (विलोपित किए गए हैं वे विधिक रूप से पहली बार के आवेदक नहीं हैं। वे पहले से ही पंजीकृत वैध मतदाता थे। चूंकि विलोपन के बाद वर्तमान में उनका नाम किसी सूची में नहीं है इसलिए उनके द्वारा फॉर्म की बाकी बातें स्वीकार्य हो सकती हैं लेकिन उनसे जबरन यह लिखवाना और हस्ताक्षर करवाना कि मैं निर्वाचक नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए पहली बार आवेदन कर रहा हूं वैधानिक रूप से पूरी तरह असत्य है।
3- आयोग द्वारा विधिक विसंगति को अनदेखा करनाः आयोग का यह रुख समझ से परे है कि एक पूर्व मतदाता से दोबारा नाम जुड़वाने के लिए ऐसी घोषणा पर हस्ताक्षर क्यों करवाए जा रहे हैं जो उसके पिछले रिकॉर्ड के खिलाफ जाती है। किसी भी नागरिक को प्रशासनिक नियमों के नाम पर एक ऐसी विधिक घोषणा करने के लिए विवश नहीं किया जा सकता जो तथ्यात्मक रूप से गलत हो।
अतः हमारी स्पष्ट और एकमात्र मांग है किः-
1- प्रक्रिया के कारण विलोपित हुए पुराने व पात्र मतदाताओं के नाम पुनः सूची में शामिल करने के लिए फार्म-6 की विधिक अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए क्योंकि इसके घोषणा भाग के बिंदु की यह विशिष्ट शर्त इन मतदाताओं पर कानूनन लागू ही नहीं होती।
2-इन प्रभावित मतदाताओं के नाम बिना किसी विरोधाभासी फॉर्म के सत्यापन अथवा किसी वैकल्पिक उचित प्रक्रिया के माध्यम से सीधे बहाल किए जाएं ताकि नागरिकों को कोई गलत विधिक घोषणा न करनी पड़े।
लालचन्द शर्मा ने कहा कि यदि आयोग इस स्पष्ट विधिक त्रुटि का अविलंब संज्ञान लेकर इसे दुरुस्त नहीं करता है तो मतदाताओं के अधिकारों और विधिक प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए हम इस विसंगति को माननीय न्यायालय के समक्ष चुनौती देने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी निर्वाचन विभाग की होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *